अगली बॉल टॉम ने धीरे से खेली और मुझे रन के लिए पुकारा, लेकिन मैंने हाथ ऊपर किया और अपनी क्रीज पर खड़ा रहा। टॉम पिच पर आधी दूरी तक आ चुका था, तभी बॉल उसके स्टंप्स से टकराई और वह रन आउट हो गया। पैवेलियन की ओर कदम बढ़ाते हुए उसने जिस तरह मुझे घूरकर देखा, उसका वैसा ही असर पड़ा जैसा उसके द्वारा निभाई गई खलनायक की भूमिकाओं में उसके हाव-भाव का होता है।
रस्किन बॉन्ड
पद्मश्री ब्रिटिश मूल के साहित्यकार
हांलैंडोर के वे बंदर भी बैंक में हैं। वे बैंक खुलने से पहले वहां होेते हैं। खूब ऊधम मचाते हैं और छत को तहस-नहस करने के लिए जो भी कर सकते हैं, करते हैं। जब बैंक बंद होता है तब भी वे वहां होते हैं और जिरेनियम के उन पौधों को तार-तार कर देते हैं जिन्हें मैनेजर ने इतने प्यार से उगाया है। बैंक के खुलते ही मैं भी वहां पहुंच जाता हूं। हमेशा की तरह इस सप्ताहांत भी मेरे पास पैसे कम पड़ गए। नतीजा यह है कि मेरी जेब में केवल एक पचास का कटा-फटा नोट है। बैंक ठीक दस बजे पाबंदी से खुल गया। बदकिस्मती से बैंक में भी पैसा नहीं है। नहीं, नहीं, यह उन अमेरिकी बैंकों की तरह धराशायी नहीं हुआ है। बात सिर्फ यह है कि जो टैक्सी मसूरी स्थित मुय ब्रांच से कैश लेकर आती है, वह सैलानियों की जबर्दस्त और अभूतपूर्व बाढ़ के कारण ट्रैफिक जाम में फंस गई है।
बहरहाल मैं मैनेजर के साथ चाय पीते हुए वक्त गुजारने लगता हूं। कैशियर के साथ नवीनतम क्रिकेट मैच के बारे में बात छिड़ जाती है। उनकी राय है कि मैच का नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि टॉस कौन जीतता है, जबकि मेरी राय यह है कि वही टीम जीतेगी जिसके खिलाड़ी पिछली रात को अच्छी तरह सोए होंगे। पैसा सुरक्षित ढंग से अंततज् पहुंच जाता है और मैं फिर खिलखिलाती धूप में निकल आता हूं। तभी कई छोटे-छोटे लड़के मुझसे टकरा जाते हैं और क्रिकेट की गेंद के लिए कुछ रुपए देने की मांग करने लगते हैं। मैं एक नया पचास का नोट उनके हवाले कर देता हूं। आगे बढ़ता हूं तो मेरी मुलाकात अचानक टॉम आल्टर क्रिकेट टीम के कई सारे सदस्यों से होती है। वे जोर देकर कहते हैं कि धोबी घाट टीम के खिलाफ उनकी इनविटेशन इलेवन टीम का मैच होने वाला है और मैं उसमें जरूर खेलूं। मुझे बताया गया कि मैच चे टांबी लैट में होगा।
अपनी उम्र को भूलकर और दून हीरोज की टीम में बारहवें खिलाड़ी के रूप में खेलने के अपने महान दिनों को याद करते हुए मैंने सहमति दे दी, लेकिन मेरी एक शर्त थी कि मेरी जगह कोई और खिलाड़ी फीçल्डंग करेगा। (अब मैं बारहवां खिलाड़ी नहीं होऊंगा)। तो धोबी घाट टीम ने अच्छा-खासा स्कोर खड़ा कर लिया था। सातवें नंबर पर जब मैं बैटिंग करने के लिए आया तब टॉम की इनविटेशन इलेवन साठ या सत्तर रनों से पीछे थी। दूसरे छोर पर पारियों को थामे हुए टॉम बैटिंग कर रहे थे। जो शस बॉलिंग कर रहा था (वह शहर में ड्राई क्लीनिंग की दुकान चलाता था), वास्तव में कमाल की रतार से गेंद फेंकता था और उसकी पहली ही गेंद मेरे सीने के नीचे आकर लगी। वह तो अच्छा हुआ कि शरीर के इस हिस्से पर मेरी पैडिंग अच्छी है (कुदरत की मेहरबानी से) लेकिन फिर भी मैंने कसम खाई कि इस ड्राई क्लीनर की दुकान पर अब फिर कभी कपड़े नहीं दूंगा। दूसरी गेंद ने मेरे बल्ले का किनारा लिया और तेजी से चार रनों के लिए चली गई। क्ववेल प्लेड, रस्किन,ं टॉम ने मेरा हौसला बढ़ाते हुए कहा। मैंने तय किया कि अपने अगले स्क्रीनप्ले में उसके लिए भी एक भूमिका लिखूंगा। तीसरी गेंद को मैंने धीरे से कवर में खेल दिया और रन लेने के लिए दौड़ पड़ा। मैं यह बिल्कुल भूल गया कि पिछले पचास सालों से मैंने एक भी रन नहीं लिया है। इसके बावजूद दूसरे छोर पर पहंुच गया। मैं हांफ रहा था और मेरे पैर कांप रहे थे। अगली बॉल टॉम ने धीरे से खेली और मुझे रन के लिए पुकारा! जॉगर्स पार्क (लैंडोर के कब्रिस्तान का यही नाम है) में सो रही महान आत्माओं में शामिल होने का मेरा कोई इरादा नहीं था। लिहाजा मैंने हाथ ऊपर किया और क्रीज पर खड़ा रहा। टॉम पिच पर आधी दूरी तक आ चुका था, तभी बॉल उसके स्टंप्स से टकराई और वह रन आउट हो गया। पैवेलियन की ओर कदम बढ़ाते हुए उसने जिस तरह मुझे घूरकर देखा, उसका वैसा ही असर पड़ा जैसा उसके द्वारा निभाई गई खलनायक की भूमिकाओं में उसके हाव-भाव का होता है। मैंने किसी तरह एक झटके से चार और रन बनाए और फिर बोल्ड हो गया। जब मैं पैवेलियन (गार्डनर के शेड में) लौटा, तो टॉम ने मजे लेते हुए कहा, क्वतुहारे लिए लिखने का काम ही बेहतर है रस्किनं। वह भूल गया कि मैंने उससे ज्यादा रन बनाए थे! बाद में मुझे न सिर्फ सबके चाय-नाश्ते का भुगतान करना पड़ा, बल्कि इनाम की धनराशि (जो धोबी घाट टीम ने जीती) में भी अपना योगदान देना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि मुझे एक बार फिर बैंक जाना पड़ा।
लंच के लिए मैं समय से घर में था। मेरा प्रिय खाना बना था राजमा-कढ़ी और साथ में आम का अचार व गरमा-गरम चपातियां। यह शनिवार का दिन था, बच्चे स्कूल से घर आ चुके थे, और हम सब साथ दुबके हुए थे। केवल गौतम के अलावा, जो भूख हड़ताल पर था क्योंकि जिस सेटरडे आइसक्रीम का उससे वादा किया गया था, वह उसे नहीं मिली थी। फिर उसके पिता आए और सबको ड्राइव पर धनौल्टी ले गए जहां आइसक्रीम इफरात से मिलती थीं।वे दिन गए जब पिकनिक के लिए ढेरों तैयारियां की जाती थीं, मेहनत से लंच बास्केट पैक की जाती थी, फिर गर्म और धूल भरी सड़क के बियाबान में पैदल निकल पड़ते थे। अब लोग पैदल नहीं चलते। वे कारों में सवार होते हैं और ड्राइव करते हुए भीड़भाड़ भरे क्वपिकनिक स्पॉटं पर पहुंच जाते हैं जहां किस्म-किस्म के ढाबों में उन्हें चाऊमीन और पिज्जा जैसे राष्ट्रीय व्यंजन बने-बनाए मिल जाते हैं। उधर ब्रिटेन में भारतीय व्यंजन लोगों के सिर चढ़कर बोल रहे हैं, यहां भारतीय तश्तरियों को चीनी और इतालवी व्यंजनों ने फतह कर लिया है। यही है आपका ग्लोबलाइजेशन।लेकिन मैं उन पुराने वक्त की पिकनिकों की कमी बहुत महसूस करता हूं। उनमें बहुत आरामतलबी होती थी और घर के बाहर काफी मौज-मस्ती की जाती थी। तब लगता था कि हमारे पास वक्त ही वक्त है और पिकनिक का मतलब होता था पूरा दिन घर के बाहर बिताना। शिमला में हम ब्रोकहस्र्ट टेनिस कोर्ट (अब यहां अपार्टमेंट बिçल्डंग बन गई हैं) पर पिकनिक मनाया करते थे, या जतोग या समर हिल पर निकल जाया करते थे, या छोटा शिमला से आगे चले जाते थे। लेकिन जाखू नहीं जाते थे जहां बंदर आपके साथ पिकनिक मनाने को अधीर बैठे रहते थे।
देहरादून में हम सल्फर çस्प्रंग्ज पर पिकनिक मनाने जाते थे, या राजपुर के नजदीक की पहाçड़यों पर चले जाते थे, या फिर टौंस या सुरवा नदियों के किनारे पर निकल जाते थे। सॉन्ग जहां गंगा से मिलती है, उसके ठीक पहले आप रायवाला में मछली पकड़ने भी जा सकते थे। छड़ी और कांटे से लैस होकर मैं और मेरे कुछ दोस्त वहां मछली पकड़ने गए थे, लेकिन अनाड़ी होने की वजह से हमारे हाथ कुछ नहीं लगा। नदी के किनारे पड़ाव डाले कुछ फौजियों ने दर्जनों मछलियां पकड़ीं (मुझे शक है उन्होंने विस्फोटकों से हतप्रभ करके उन्हें फंसाया) और उनमें से दो-एक बड़ी सिंघारा मछलियां उन्होंने हमें दे दीं। हम अपनी इस क्वपकड़ं के साथ देहरादून लौटे और अपने दोस्तों व पड़ोसियों पर मछली पकड़ने में अपनी निपुणता और दिलेरी की खूब छाप छोड़ी।
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